Dilip Lokre blog
सोमवार, 5 अप्रैल 2010
हिंदी चर्चा
उसने तो लुटा दी सारी नेमते अपनी हमारे लिए/
और हम है कि लड़ते है एक मकां के लिए ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें