रविवार, 18 जुलाई 2010

समझदार बच्चा
कभी चाँद को रोटी समझने वाला बच्चा
अब समझदार हो गया है
वह जानता है रोटी, रोटी है
चाँद नहीं
वह यह भी जानता है
अच्छी तरह
की मेहनत करे बिना रोज
रात को चाँद दिख सकता है
रोटी नहीं
और शायद इसी लिए
रात को चाँद देखने के बदले
वह काम करता है
तभी पाता है
सुबह-सुबह रोटी,भरपेट
-- दिलीप लोकरे

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