Dilip Lokre blog
बुधवार, 31 मार्च 2010
अपने अधिकार
सडक किसके लिए है और जंगल किसके लिए ?
रोज की आपाधापी भरी जिंदगी में हम अकसर यह उम्मीद करते है
कि
हमें
सारी
वह सुविधाए मिले जो मिलनी चाहिए , लेकिन उन सुविधाओ कि चाह में अपने कर्त्तव्य भूल जाते हैं । हमारी सुविधा यदि दूसरे कि असुविधा होती हो तो हमें अपने कर्तव्य का बोध भी होना ही चाहिए .
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